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आखिर क्यों भगवान शिव ने गणेश जी को हाथी का ही सिर लगाया? जानें क्या है इसकी वजह

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हिंदू धर्म में भगवान गणेश को ‘प्रथम पूजनीय’ देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनका स्मरण करना आवश्यक माना जाता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और मंगलकर्ता के रूप में पूजा जाता है। उनके स्वरूप की सबसे खास विशेषता है—हाथी जैसा विशाल सिर, बड़े कान और लंबा सूंड। यही रूप उन्हें अन्य सभी देवताओं से अलग और विशिष्ट बनाता है। लेकिन प्रश्न यह है कि आखिर गणेश जी को मानव का सिर देने के बजाय हाथी का ही सिर क्यों लगाया गया? इस रहस्य को धर्मग्रंथों और पुराणों में विस्तार से बताया गया है।

गणेश जी की उत्पत्ति

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवी पार्वती स्नान के लिए जा रही थीं। उस समय उन्होंने अपने उबटन से एक सुंदर बालक की रचना की और उसमें प्राण फूंक दिए। उस बालक का नाम रखा गया गणेश। माता ने आदेश दिया कि जब तक वे स्नान करें, तब तक कोई भी अंदर न आए। गणेश जी ने मां के आदेश का पालन करते हुए बाहर पहरा देना शुरू किया।

भगवान शिव ने क्यों काटा सिर?

कुछ समय बाद भगवान शिव वहां आए और अंदर जाने लगे। लेकिन गणेश जी ने उन्हें रोक दिया, क्योंकि उन्हें पता नहीं था कि वे उनके पिता हैं। गणेश जी की हठ देखकर भगवान शिव क्रोधित हो उठे। क्रोधावेश में उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर काट दिया। यह दृश्य देखकर माता पार्वती अत्यंत व्यथित हुईं और विलाप करने लगीं। उन्होंने शिव से कहा कि यदि गणेश को पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो वे सृष्टि का संहार कर देंगी।

हाथी का सिर क्यों?

माता पार्वती को शांत करने के लिए भगवान शिव ने अपने गणों को आदेश दिया कि उत्तर दिशा की ओर जाओ और जो भी पहला जीव मिले, उसका सिर ले आओ। गण उनके आदेश का पालन करते हुए उत्तर दिशा में गए, जहां उन्हें देवताओं के राजा इंद्र का वाहन एरावत हाथी मिला। गणों ने उसी का सिर काटकर शिवजी को दिया। भगवान शिव ने उस हाथी का सिर गणेश के धड़ से जोड़ दिया और उन्हें पुनर्जीवित किया। तभी से वे ‘गजानन’ और ‘गणपति’ कहलाए।

हाथी के सिर का आध्यात्मिक महत्व

गणेश जी का हाथी का सिर केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि गहरा प्रतीकवाद भी दर्शाता है।

  • बुद्धि और ज्ञान का प्रतीक: हाथी को सबसे बुद्धिमान प्राणी माना गया है। गणेश जी को भी बुद्धि और विवेक का देवता माना जाता है।

  • धैर्य और शांति का प्रतीक: हाथी का स्वभाव शांत और धैर्यपूर्ण होता है। गणेश जी भी यही संदेश देते हैं कि जीवन में संयम और धैर्य से ही सफलता मिलती है।

  • बड़े कान का महत्व: हाथी के बड़े कान यह दर्शाते हैं कि मनुष्य को अधिक सुनना चाहिए और कम बोलना चाहिए।

  • लंबी सूंड का संदेश: गणेश जी की सूंड उनकी शक्ति और कार्यकुशलता का प्रतीक है। यह सिखाती है कि हमें छोटे से छोटे कार्य और बड़े से बड़े कार्य में दक्ष होना चाहिए।

भगवान गणेश का हाथी का सिर उनके अनोखे और अद्वितीय स्वरूप की पहचान है। यह कथा केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि जीवन के लिए गहरी शिक्षाएँ भी देती है। गणेश जी हमें सिखाते हैं कि बुद्धि, धैर्य, विवेक और समर्पण से हर कठिनाई को दूर किया जा सकता है। यही कारण है कि वे सभी देवताओं में अग्रणी हैं और हर शुभ कार्य की शुरुआत उनसे होती है।

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